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मंगलवार, 24 अगस्त 2010

AU-News

रेखाएं बोलती हैं, जरा तन्मय होकर देखें
अमर्त्य प्रकाश
Story Update : Saturday, August 21, 2010 9:21 PM

एक कार्टूनिस्ट के लिए तीन चीजें महत्व रखती हैं, आइडिया, रेखांकन और कैप्शन। ललित कला अकादमी दिल्ली में 4 से 19 अगस्त तक लगी प्रदर्शनी में युवा कार्टूनिस्ट तन्मय के कार्टून्स को देखने के बाद लगता है कि उनके पास ये तीनों चीजें हैं। उनके विचार प्रखर हैं। रेखाएं बोलती हैं। और कैप्शन इतने कम बोलते हैं कि तुलसीदास के ‘अरथ अमित अति आखर थोरे’ की याद आती है। यानी कम से कम शब्द और ज्यादा से ज्यादा अर्थ। मुशर्रफ की पराजय पर वे बैलट बॉक्स में कैद मुशर्रफ को दिखाते हैं और कैप्शन में सिर्फ दो शब्द लिखते हैं- मुशर ऑफ। ये दो शब्द भी जनरल के नाम के एक शब्द को तोड़ कर बनाए गए हैं।

इसी तरह अमेरिकी महामंदी पर उनके कार्टून का शीर्षक है-ग्रेट अमेरिकन ड्रीम। इसके साथ स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का रेखांकन है। और मूर्ति के हाथ में एक खाली कटोरा है। तन्मय की दृष्टि इतनी सूक्ष्म है कि उनके केरीकेचर तक दर्शक से पारखी होने की मांग करते हैं। ऊपर मनमोहन सिंह का जो केरीकेचर लगा है, उसे ध्यान से देखिए, उनकी बायीं आंख उनके चेहरे से बाहर है। जैसे ही आप केरीकेचर में इस बात को लक्ष्य करते हैं, वह महज एक केरीकेचर नहीं रह जाता, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर एक सशक्त टिप्पणी में बदल जाता है। विचार,संवेदना और कला तीनों स्तर पर वे अपने पिता जाने माने कलाकार, कवि हरिप्रकाश त्यागी के सच्चे वारिस हैं।

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GHAZIABAD, Uttar Pradesh, India
कला के उत्थान के लिए यह ब्लॉग समकालीन गतिविधियों के साथ,आज के दौर में जब समय की कमी को, इंटर नेट पर्याप्त तरीके से भाग्दौर से बचा देता है, यही सोच करके इस ब्लॉग पर काफी जानकारियाँ डाली जानी है जिससे कला विद्यार्थियों के साथ साथ कला प्रेमी और प्रशंसक इसका रसास्वादन कर सकें . - डॉ.लाल रत्नाकर Dr.Lal Ratnakar, Artist, Associate Professor /Head/ Department of Drg.& Ptg. MMH College Ghaziabad-201001 (CCS University Meerut) आज की भाग दौर की जिंदगी में कला कों जितने समय की आवश्यकता है संभवतः छात्र छात्राएं नहीं दे पा रहे हैं, शिक्षा प्रणाली और शिक्षा के साथ प्रयोग और विश्वविद्यालयों की निति भी इनके प्रयोगधर्मी बने रहने में बाधक होने में काफी महत्त्व निभा रहा है . अतः कला शिक्षा और उसके उन्नयन में इसका रोल कितना है इसका मूल्याङ्कन होने में गुरुजनों की सहभागिता भी कम महत्त्व नहीं रखती.