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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

बीबीसी हिंदी से साभार -

पिकासो के बनाए रेखाचित्रों की नीलामी
गेनेविएव लापोर्ते
लापोर्ते पहली बार पिकासो से तब मिली थी जब वो स्कूल में थीं
प्रसिद्ध स्पेनी चित्रकार पाब्लो पिकासो के बनाए 20 रेखाचित्रों की सोमवार को पेरिस में नीलामी हो रही है.

इन चित्रों को बेच रही है पिकासो की पूर्व प्रेमिका गेनेविएव लापोर्ते.

1950 के दशक में लोपोर्ते और पिकासो का दो साल गुप्त रुप से प्रेम चला था.

लापोर्ते ने कहा कि वो एक बार फिर पिकासो को स्थापित करना चाहती है.

महिलाओं के साथ संबंधों के मामले में पिकासो को काफी घमंडी और गुस्सैल माना जाता रहा है.

79 वर्षीय लापोर्ते ने उम्मीद जताई कि कोई एक व्यक्ति इन सभी रेखाचित्रों को खरीद लेगा.

उन्होंने कहा " ये रेखाचित्र किसी नदी की तरह हैं. जहां आप पानी की बूंदों को अलग नहीं कर सकते. "

लापोर्ते ने इन रेखाचित्रों को पिकासो के संबंधियों को देने से भी इंकार किया था. उनका कहना था कि पिकासो के संबंधी इन रेखाचित्रों के साथ
वैसा रिश्ता नहीं बना सकते जैसा उनका संबंध है.

लापोर्ते की पिकासो के साथ पहली मुलाक़ात 1944 में हुई थी जहां लापोर्ते ने अपने स्कूल के अख़बार के लिए पिकासो का इंटरव्यू किया था.

लापोर्ते ने कहा " जब मैंने पहली बार पिकासो को देखा था तो वे बहुत प्यारे और अच्छे लगे थे. "

इसके छह साल बाद दोनों के बीच प्रेम संबंध बने. जब दोनों का प्रेम हुआ तो पिकासो और लापोर्ते के बीच उम्र का बड़ा अंतर था.

1951 में जब दोनों का प्रेम चरम पर था तो पिकासो ने सेंट ट्रोपेज़ में लापोर्ते की कई तस्वीरें बनाईं.

कुछ तस्वीरों पर लिखा हुआ है. " गेनेविएव के लिए".

पिकासो ने दो साल के बाद अपनी एक अन्य प्रेमिका फ्रैंकोयज़ गिलोस से संबंध टूटने के बाद लापोर्ते को अपने साथ रहने के लिए बुलाया जिसे लापोर्ते ने ठुकरा दिया.

लापोर्ते ने 1959 में शादी कर ली और आगे चलकर जानी मानी फ़िल्ममेकर और कवयित्री के रुप में उनकी पहचान बनी.

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GHAZIABAD, Uttar Pradesh, India
कला के उत्थान के लिए यह ब्लॉग समकालीन गतिविधियों के साथ,आज के दौर में जब समय की कमी को, इंटर नेट पर्याप्त तरीके से भाग्दौर से बचा देता है, यही सोच करके इस ब्लॉग पर काफी जानकारियाँ डाली जानी है जिससे कला विद्यार्थियों के साथ साथ कला प्रेमी और प्रशंसक इसका रसास्वादन कर सकें . - डॉ.लाल रत्नाकर Dr.Lal Ratnakar, Artist, Associate Professor /Head/ Department of Drg.& Ptg. MMH College Ghaziabad-201001 (CCS University Meerut) आज की भाग दौर की जिंदगी में कला कों जितने समय की आवश्यकता है संभवतः छात्र छात्राएं नहीं दे पा रहे हैं, शिक्षा प्रणाली और शिक्षा के साथ प्रयोग और विश्वविद्यालयों की निति भी इनके प्रयोगधर्मी बने रहने में बाधक होने में काफी महत्त्व निभा रहा है . अतः कला शिक्षा और उसके उन्नयन में इसका रोल कितना है इसका मूल्याङ्कन होने में गुरुजनों की सहभागिता भी कम महत्त्व नहीं रखती.