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शनिवार, 18 सितंबर 2010

भारत लौटना - हुसेन का !


डॉ.लाल रत्नाकर
भारत एक महान देश है, यह हम बचपन से पढते आये है, और देख भी रहे है है कि भारत कितना महान देश है यहाँ एक बार पैदा हो जाना और तमाम अधिकारों को पा जाना इस देश कि खासुशियत है, रहि बात यहाँ मकबूल फ़िदा हुसेन कि तो इसमे कोई आश्चर्य नहीं कि हुसेन वापस आ जाएँ , जिन लोगों को ऐसा लग रहा था कि चलो बला चली गयी कि अब कोई नंगा नहीं होगा , न सरस्वती , न लक्ष्मी , न दुर्गा और न जाने कौन कौन !
पर भारत रोज रोज किसी न किसी को नंगा करने पर मज़बूर करता है, यहाँ कि सामाजिक धार्मिक और राजनितिक व्यवस्था इतने कमजोर पर इतने गहरे तक जड जमाए है कि सामान्यतया इस पर यहाँ कि न्यायिक व्यवस्था भी कुछ नहीं कर पाती उलटे उन्ही जकडनों के अधीन चलती है, उसी का अनुशरण हम आँख मुद् कर करते रहते है नैतिक तरीके से सोचने कि सारी सामर्थ्य ही हमने खो दी है और यही कारन है कि यहाँ विकास के मायने में नैतिकता न होकर अनैतिक तरीके से हडपने कि चलने कि आचरण करने कि प्रवृत्तियों ने जन्म ले लिया
है .
तो ऐसा भारत और हुसेन जहाँ गए है वहा की प्रवृतियाँ फरक तो करने की इजाजत कहाँ तक देती होंगी, कला की असीम सीमायें है पर पूरी दुनिया इस बात की इजाजत कहाँ तक देती होगी. जहाँ न्याय की जटिलताएं लम्बा खींचने नहीं देती है, मृत्यु दंड तो आम ही नहीं चौराहों पर खड़े करके मार देने की है -
आओ हुसेन
हम स्वागत करेंगे
अखबार तुम्हे
छाप कर
धन्य होंगे
'कला' की
एक बड़ी खबर
बनोगे
सारी कला 'दीर्घाएं
तुम्हारा इंतज़ार
कर रहीं है
उनके निदेशक
प्यासे बैठे है
आओ
जल्दी आओ
यहाँ कला बाज़ार
खोखला हो गया है
जब से
यहाँ से गए हो
सारे कलाकार
उदास हो गए है
और कुछ नया नहीं
रच रहे है
क्योंकि उन्हें पता है
की वह यहाँ से
कहीं नहीं जा सकते
क्योंकि
इनके अपने धर्म
के और कोई
सशक्त देश नहीं है
जो इन्हें
शरण दे दे !
यही कारन भी हो
कि यह कुछ ऐसा नहीं
कर पाते जिस पर
अखबार चर्चा करे
आओ 'हुसेन'
जल्दी आओ.
उन मुकदमो से
मत घबराओ
वह आपका इंतज़ार
कर रहे है ,
यहाँ आपके
पैरोकार उदास है
की उनका
मुवक्किल 'क़तर'
चला गया है
लौटेगा तो देखेंगे
फिर पेशी करेंगे
आओ हुसेन
जल्दी आओ .

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With curtsy-

एमएफ़ हुसैन से बातचीत का पहला हिस्सा

जाने माने पेंटर एमएफ़ हुसैन ने पिछले दिनों लंदन में अपना 95वां जन्मदिन मनाया.

इस वर्ष के शुरू में क़तर की नागिरकता लेने की वजह से सुर्ख़ियों में आए हुसैन ने बीबीसी से लंबी बातचीत की.

इस बातचीत के पहले हिस्से में उन्होंने अपने जीवन और अपनी जीवन शैली के बारे में बताया.

क्लिक करेंएमएफ़ हुसैन के साथ बातचीत का दूसरा हिस्सा

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    GHAZIABAD, Uttar Pradesh, India
    कला के उत्थान के लिए यह ब्लॉग समकालीन गतिविधियों के साथ,आज के दौर में जब समय की कमी को, इंटर नेट पर्याप्त तरीके से भाग्दौर से बचा देता है, यही सोच करके इस ब्लॉग पर काफी जानकारियाँ डाली जानी है जिससे कला विद्यार्थियों के साथ साथ कला प्रेमी और प्रशंसक इसका रसास्वादन कर सकें . - डॉ.लाल रत्नाकर Dr.Lal Ratnakar, Artist, Associate Professor /Head/ Department of Drg.& Ptg. MMH College Ghaziabad-201001 (CCS University Meerut) आज की भाग दौर की जिंदगी में कला कों जितने समय की आवश्यकता है संभवतः छात्र छात्राएं नहीं दे पा रहे हैं, शिक्षा प्रणाली और शिक्षा के साथ प्रयोग और विश्वविद्यालयों की निति भी इनके प्रयोगधर्मी बने रहने में बाधक होने में काफी महत्त्व निभा रहा है . अतः कला शिक्षा और उसके उन्नयन में इसका रोल कितना है इसका मूल्याङ्कन होने में गुरुजनों की सहभागिता भी कम महत्त्व नहीं रखती.