गुरुवार, 9 जून 2011

जीवंत कलाकार का निधन


सुशीला सिंह

एमएफ़ हुसैन
भारत के प्रसिद्ध चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के निधन पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खेद व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्रीय क्षति बताया है.
लंदन के एक अस्पताल में 95 वर्षीय हुसैन ने अंतिम साँस ली. वह पिछले एक महीने से बीमार चल रहे थे.
जहाँ एमएफ़ हुसैन को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्म विभूषण से नवाज़ा गया वहीं वे अपने कई चित्रों की वजह से विवादों में भी घिरे रहे थे.
'भारत के पिकासो' कहे जाने वाले एमएफ़ हुसैन को साल 1996 में हिंदू देवी-देवताओं की नग्न चित्रकारी की वज़ह से विवादों का सामना करना पड़ा.
हमारी सरकार ने उन्हें तवज्जो ही नहीं दी. सरकार ने उनकी वापसी को लेकर एक शब्द ही नहीं कहा. एक इतने बड़े कलाकार को किसी देश ने नहीं निकाला होगा."
राम कुमार,चित्रकार
इस घटना के बाद एमएफ़ हुसैन को जान की धमकी दी गई जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा.

लोगों के साथ खुश

उनके क़रीबी दोस्त और जाने-माने चित्रकार राम कुमार का कहना था कि हुसैन आम लोगों के साथ रहना पसंद करते थे और लोगों के झुंड में रहकर पेंटिंग करना पसंद करते थे.
सरकार से नाराज़ रामकुमार ने कहा, "हमारी सरकार ने उन्हें तवज्जो ही नहीं दी. सरकार ने उनकी वापसी को लेकर एक शब्द ही नहीं कहा. एक इतने बड़े कलाकार को किसी देश ने भी अपने यहां से निकाला नहीं होगा."
वह 95 साल तक ज़िंदा रहे लेकिन सरकार और समाज चुप रहा, उन्हें वापस लाने की किसी ने कोशिश नहीं की. भारत में उनके जीवन को ख़तरा था, तब भी ये नहीं कहा कि हम यहाँ उनकी देखभाल करेंगे.
जतिन दास, चित्रकार
हुसैन पर लोगों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने का आरोप लगा जब उन्होंने हिंदू देवी और देवताओं की नग्न तस्वीरें बनाईं.
उनके विरुद्ध कई केस दर्ज किए गए और एक कोर्ट केस में उनके ख़िलाफ़ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए. इसके बाद से वह देश के बाहर ही रह रहे थे.
इसी मुद्दे पर जाने-माने चित्रकार जतिन दास ने भी सरकार और मीडिया के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की.
जतिन दास का कहना था, "वह 95 साल तक ज़िंदा रहे लेकिन सरकार और समाज चुप रहा, उन्हें वापस लाने की किसी ने कोशिश नहीं की. भारत में उनके जीवन को ख़तरा था, तब भी ये नहीं कहा कि हम उनकी देखभाल करेंगे."
रामकुमार का कहना था कि जब उन्होंने हुसैन से पूछा था कि क्या उनका भारत आने का मन नहीं करता तो उनका कहना था, "मेरा मन करता है कि मैं खिड़की से कूद कर मर जाऊँ."

कार के शौकीन

रामकुमार ने पुरानी यादें ताज़ा की और कहा कि हुसैन मुम्बई के ग्रांट रोड पर ईरानी चाय पीना चाहते थे. राजकुमार के अनुसार उन्हें कारों और टेनिस का बहुत शौक था.
लेकिन उनकी विवादास्पद चित्रकारी और फ़िल्मों के बारे में ज़्यादा कुछ कहे बिना बस यही कहा कि आपातकाल के दौरान हुसैन ने अपनी चित्रकारी में इंदिरा गांधी को भारत माता करार दिया था, जिसके बाद कला जगत में भी उनकी ख़ासी आलोचना हुई थी.
मैं जब 18 साल की थी जब उन्होंने मेरा काम देखा और मेरी चित्रकारी की प्रदर्शनी लगाई. मेरे घर के गार्डन में उन्होंने खुद तंबु लगाया और मेरी 55 पेंटिंग को फ्रेम करवाया, निमत्रण पत्र को तैयार किया. मैं ये बात कभी नहीं भूल सकती.
एंजोली इला मेनना,चित्रकार
उस वक़्त जब रामकुमार ने उनसे पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं तो वो केवल हँस दिए थे. रामकुमार का कहना था कि हुसैन जैसा व्यक्तित्व और प्रतिभा न किसी में होगी न हो सकती है.
चित्रकार जतिन दास ने सरकार से माँग की कि हुसैन के शव को भारत लाया जाए.
विश्व प्रसिद्ध चित्रकार एंजोली इला मेनन ने हुसैन के निधन पर शोक जताते हुए कहा वह मेरे दोस्त, मेंटर और गाइड थे.
उनका कहना था कि हुसैन का 'सेंस ऑफ ह्ययुमर' बहुत ही बढ़िया था और मै उन्हें वे मैक कहकर बुलाया करती थीं.

जीवंत

एंजोली इला मेनन का कहना था कि, "मैं जब 18 साल की थी जब उन्होंन मेरा काम देखा और मेरी चित्रकारी की प्रदर्शनी लगाई. मेरे घर के गार्डन में उन्होंने खुद तंबु लगाया और मेरी 55 पेंटिंग को फ्रेम करवाया, निमंत्रण पत्र को तैयार किया. मैं ये बात कभी नहीं भुल सकती."
उनका कहना था कि फ़िल्में बनाने का तो उन्हें बहुत शौक था लेकिन वे तीन ही फ़िल्में बना पाए.
हालांकि इला मेनन ने इतना ज़रुर कहा कि वे 'अच्छे फिल्मकार नहीं' थे.

बुधवार, 8 जून 2011

मंगलवार, 7 जून 2011

पेण्टिंग डिमास्ट्र्ेशन


डा0 राम शब्द सिंह
अध्यक्ष
चित्रकला विभाग जे.वी. जैन कालेज सहारनपुर
द्वारा
चित्रकला विभाग एम.एम.एच. कालेज गाजियाबाद
दिनांक.08.06.2011 को प्रातः08 बजे से 10 बजे तक
पेण्टिंग डिमास्ट्र्ेशन
आप सादर आमन्त्रित हैं।

डा.लाल रत्नाकर
अध्यक्ष चित्रकला विभाग
एम.एम.एच. कालेज गाजियाबाद
9810566808 


मंगलवार, 31 मई 2011

प्रयोगात्मक परीक्षा के सम्बन्ध में

सूचना
चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय की वर्ष 2010-2011 की चित्रकला की प्रयोगात्मक परीक्षा के सम्बन्ध में एम0 एम0 एच0 कालेज गाजियाबाद के समस्त चित्रकला के छात्र/छात्राओं को सूचित किया जाता है कि उनकी प्रयोगात्मक परीक्षाएं निम्न तिथियों में चित्रकला विभाग में आयोजित होनी हैं-
एम0 ए0 द्वितीय वर्ष - दिनांक-10, 11 व 12 जून २०११ समय- 7-10, 11-02, 03-06 तीनों पाली में।
एम0 ए0 प्रथम सेमेस्टर - दिनांक-07, 08 व 09 जून २०११ समय-7-10, 11-02, 03-06 तीनों पाली में।
बी0 ए0 तृतीय वर्ष - दिनांक-07 जून २०११ समय-7-10, 11-02, दो पाली में।
बी0 ए0 द्वितीय वर्ष - दिनांक-13 जून २०११ समय-7-10, 11-02, दो पाली में।
बी0 ए0 प्रथम वर्ष - दिनांक-14 जून २०११ समय-7-10, 11-02, दो पाली में।


                                                                                                                             

बुधवार, 25 मई 2011

सैटेलाइट ने ढूँढे 17 और पिरामिड

बी बी सी से साभार-

पिरामिड (फ़ाइल फ़ोटो)
मिस्र में मिले इन नए पिरामिडों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं थी
सैटेलाइट के ज़रिए किए गए एक नए सर्वेक्षण से लुप्त हो चुके 17 पिरामिडों और एक हज़ार से अधिक ऐसे मक़बरों का पता चला है जिसकी अब तक खुदाई नहीं की गई है.
ये सर्वेक्षण नासा के सहयोग से एक अमरीकी प्रयोगशाला की ओर से किया गया है.
इसमें उच्च स्तरीय इंफ़्रा-रेड तकनीक का उपयोग किया गया जिससे भूमिगत वस्तुओं की तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं.
मिस्र के अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक के उपयोग से प्राचीन स्मारकों को बचाने में सहायता मिलेगी क्योंकि इसके ज़रिए ये पता लगाया जा सकता है कि उनकी खुदाई करके वहाँ लूट तो नहीं हो गई है.

सर्वेक्षण

अलाबामा यूनिवर्सिटी की एक टीम ने सैटेलाइट से लिए गए उन तस्वीरों का अध्ययन किया जो इंफ़्रा-रेड कैमरों की मदद से खींची गई थीं.
इससे ज़मीन के भीतर मौजूद चीज़ों का पता लगाया जा सकता है.
शोध कर रही टीम ने जिस सैटेलाइट का उपयोग किया वह पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा कर रहा है लेकिन इसके कैमरे इतने शक्तिशाली हैं कि वे पृथ्वी की सतह पर एक मीटर के व्यास में मौजूद चीज़ों की तस्वीरें ले सकते हैं.
सैटेलाइट पुरातत्वविदों ने मिट्टी से बने कई इमारतों का पता लगाया है जिनमें पिरामिड के अलावा कुछ मिस्र के पुराने मकान हैं, धर्म स्थल हैं और मक़बरें हैं.
उनका कहना है कि आसपास की मिट्टी से ज़्यादा घनत्व वाले ढाँचों के आधार पर इनकी पहचान की गई है.
अब तक एक हज़ार से ज़्यादा मक़बरे और तीन हज़ार पुरानी इमारतों का अब तक पता लगाया जा चुका है.

उत्साह

आरंभिक खुदाई से इस शोध में मिली कुछ जानकारियों की पुष्टि भी हो गई है.
हम एक साल से भी अधिक समय से शोधकार्य में लगे हुए थे. मैं सैटेलाइट से मिल रही जानकारियों को देख रही थी लेकिन 'वाह' कहने वाला क्षण उस समय आया जब हमने एक क़दम पीछे हटकर सारी सामग्री को देखा. हमे सहसा विश्वास नहीं हुआ कि हमने मिस्र में इतनी चीज़ों का पता लगा लिया है
डॉ सारा पारकैक, प्रमुख शोधकर्ता
जिसमें सक़्क़ारा में ज़मीन में दबे गए दो पिरामिड शामिल हैं.
जब शोध कर रहा दल वहाँ पहुँचा था तो कम ही लोगों को भरोसा था कि वहाँ कुछ मिलेगा लेकिन खुदाई शुरु हुई तो इन पिरामिडों का पता चला. अब संभावना व्यक्त की जा रही है कि ये मिस्र के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्मारकों में से एक साबित हो सकते हैं.
डॉ सारा पारकैक बरमिंघम और अलाबामा स्थित प्रयोगशालाओं में नासा के सहयोग से इस परियोजना पर काम कर रही हैं.
उन्होंने सैटेलाइट से मिली तस्वीरों की मदद से पुरातात्विक सर्वेक्षण के काम की शुरुआत की है.
वे कहती हैं, "हम एक साल से भी अधिक समय से शोधकार्य में लगे हुए थे. मैं सैटेलाइट से मिल रही जानकारियों को देख रही थी लेकिन 'वाह' कहने वाला क्षण उस समय आया जब हमने एक क़दम पीछे हटकर सारी सामग्री को देखा. हमे सहसा विश्वास नहीं हुआ कि हमने मिस्र में इतनी चीज़ों का पता लगा लिया है."
वे मानती हैं कि ये तो शुरुआत भर है.
वे कहती हैं, "जिसका हमने पता लगाया है वो तो सतह के क़रीब हैं. इसके अलावा हज़ारों ऐसे स्थान हो सकते हैं जो नील नदी की गाद में दब गए होंगे."
डॉ सारा पारकैक कहती हैं कि सबसे अद्भुत क्षण तानिस में आया.
वे बताती हैं कि खुदाई में एक तीन हज़ार साल पुराना मकान निकला जिसका पता सैटेलाइट की तस्वीरों से मिला था और सब चकित रह गए जब मकान और तस्वीर में समानता मिली.

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

C.C.S. University, Meerut Code List 2010 – 11 M.A. – Visual Art, Drawing and Painting (000)



(01)
C.C.S. University, Meerut Code List 2010 – 11
M.A. – Visual Art, Drawing and Painting (000)
Ist Semester
I  G-1000 Indian Painting (Prehistoric to Pahri) 50-50=100
II G-1001 Philosophy of Art (Indian) 50-50=100
   G-500A Composition Based on Indian Miniature (Practical) 50-50=100
   G-500B Portrait Study (Practical) 50-50=100
   G-500C Professional Application (Practical) 50-50=100

IInd Semester
III G-2000 History of Modern Painting (Company School to Contemporary Period)50-50=100
IV G-2001 Philosophy of Art (Western) 50-50=100
    G-600A Thematic Composition (Practical) 50-50=100
    G-600B Life Study (Monochrome) (Practical) 50-50 =100
    G-600C Folk Art in any one style (Practical) 50-50 =100



मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
GHAZIABAD, Uttar Pradesh, India
कला के उत्थान के लिए यह ब्लॉग समकालीन गतिविधियों के साथ,आज के दौर में जब समय की कमी को, इंटर नेट पर्याप्त तरीके से भाग्दौर से बचा देता है, यही सोच करके इस ब्लॉग पर काफी जानकारियाँ डाली जानी है जिससे कला विद्यार्थियों के साथ साथ कला प्रेमी और प्रशंसक इसका रसास्वादन कर सकें . - डॉ.लाल रत्नाकर Dr.Lal Ratnakar, Artist, Associate Professor /Head/ Department of Drg.& Ptg. MMH College Ghaziabad-201001 (CCS University Meerut) आज की भाग दौर की जिंदगी में कला कों जितने समय की आवश्यकता है संभवतः छात्र छात्राएं नहीं दे पा रहे हैं, शिक्षा प्रणाली और शिक्षा के साथ प्रयोग और विश्वविद्यालयों की निति भी इनके प्रयोगधर्मी बने रहने में बाधक होने में काफी महत्त्व निभा रहा है . अतः कला शिक्षा और उसके उन्नयन में इसका रोल कितना है इसका मूल्याङ्कन होने में गुरुजनों की सहभागिता भी कम महत्त्व नहीं रखती.